ल्यादे ल्यादे रे अंजनी का लाल, लक्ष्मण खातिर संजीवन जड़ी

 ल्यादे ल्यादे रे अंजनी का लाल, लक्ष्मण खातिर संजीवन जड़ी

1. द्रोणगिरी पर वैद्य बताई संजीवन की बैल
ओर किसी के बसको नाही, तेरे हांसी को खेल
भाई लक्ष्मण का बिगड़ गया हाल, सिर पै म्हारे संकट की घड़ी

2. पहले वन मैं नारी खोई अब खो दियो भ्रात
मेरी अकल काम ना आवे दिन मैं हो गई रात
जाणे हिरण चूक गया चाल, भंवर में नैया आन पड़ी ........

3. अवधपुरी मैं कैसे जाऊं थर थर कांपे गात
कहां छोड़े लक्ष्मण जी भ्राता यूं पूछेगी मात
जद पैरां की धरती जा पाताल, माता रोवे खड़ी रे खड़ी ........

4. इतना सुणके हनुमत चाल्या चरणा शीश नवाकर
द्रोणगिरी पै माया रचदी लंकापति के चाकर
बुटी मिली ना जद मन मैं उठी झाल, पर्वत ज्यूं हाथ मैं दड़ी

5. पर्वत लेके आयो अवधपुर भरत चलायो तीर
लाग्यो बाण पडय़ो धरती में सहाय करे रघुबीर
आकर भरत जी नै पुछा सारा हाल, नेणा सूं लागी आंसू झड़ी

6. नाम तेरो सुण राख्यो हनुमान तूं है साचो वीर
आज ताईं कोई मुख सै ना बोल्यो जद लाग्यो मेरो तीर
अब तो उठ ज्या रे जल्दी सी चाल, सुरज उगण मैं दो घड़ी

7. हनुमान संजीवन ल्यायो लक्ष्मण चेत करयो
मोहन करे राम जी राजी सारो काज सरयो
जां पै होज्या रै हनुमत रिछपाल, विपदा बांकी दूर जा पड़ी

BOL BHAJAN