गुरां नै प्रेम प्यारो रे
या संसार ठगा वाली नगरी, रहणो न्यारो रै ॥
या संसार ठगा वाली नगरी, रहणो न्यारो रै ॥
1. दुरमत मैं हरि ना मिले कोई खोजत हारो रै
मिटै जब दुरमत ज्ञान विचारो थारो होवै उजियारो रै ........
2. सत सिमरण का सैल बनाले कारज सारो रै
पांचा नै पकड़ पच्चीसा नै बस कर चोरां नै मारो रै ........
3. सत की चोपड़ डाल प्रेम का पासा डारो रै
राम नाम की स्याह उथल बाजी मत ना हारो रै ........
4. ज्ञान वैराग भयो घट भीतर भयो उजियारो रै
कहत कबीर सुनो भाई साधो थारो जन्म सुधारो रै ........
https://www.youtube.com/watch?v=_lcccoUkPI0