मेरा दिया भ्रम गढ़ तोड़ बंदी छोड़ की हमन शरण लेई
1. ओर सखी सब दुबली ए तूं ब्रिहण क्यूं लाल
अविनाशी की सैज पै ए लेई मन्नैं मौज निहार
ठाडा गी हमनै शरण लेई .......
2. अविनाशी की सेज का कहो कितना के अनुमान
कहना सुणना है नहीं लखै सोई प्रमाण
ठाडा गी हमनै शरण लेई .......
3. जो मांगे शरणे बसे जो वानें बांगी लाज
उल्टे जल मच्छी चढे और वह जावे गजराज
ठाडा गी हमनै शरण लेई .......
4. सतवंती पीहर बसै अन्तर पीये मैं ध्यान
कहणा सुनना है नहीं ऐसा है आंतरम ज्ञान
ठाडा गी हमनै शरण लेई .......
5. ब्याही ने कुंवारी मिली बिंगा फिका लागे नेण
ब्याही नै ब्याही मिली मिली सैन मैं सैन
ठाडा गी हमनै शरण लेई .......
6. हंसी ना बोली उनमणी बिंगा टग टग लाग्या नैण
कह कबीर वा लख गई रै सखी ए सखी गी वा सैन
ठाडा गी हमनै शरण लेई .......